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Wednesday, September 9, 2009

नृशंसता से नहीं मारे जा सकते आतंकवादी

इशरत जहां और तीन अन्य की फर्जी मुठभेड़ पर विवाद के बीच केंद्र ने बुधवार को कहा कि वह
अदालत में दिए गए हलफनामे पर कायम है कि चारों संदिग्ध थे लेकिन यह भी कहा कि
‘‘आतंकवादियों को नृशंसतापूर्वक नहीं मारा जा सकता है।’’ गृह सचिव जीके पिल्लई ने कहा, ‘‘ हमने
शपथपत्र में जो भी कहा है वह गृह मंत्रालय के पास उपलब्ध तथ्यों के आधार पर है, हम हलफनामे
से पीछे नहीं हट रहे हैं।’’ हालांकि उन्होंने कानून की समुचित प्रक्रिया के पालन की ओर संकेत करते
हुए कहा कि ‘‘आतंकवादियों की नृशंसता से हत्या नहीं की जा सकती।’’ पिल्लई ने स्पष्ट किया कि
‘तथाकथित मुठभेड़’ में केंद्रीय एजेंसियों से कोई व्यक्ति शामिल नहीं था।उन्होंने कहा, ‘गृह मंत्रालय का मुठभेड़ से कोई लेना देना नहीं है। हमने खुफिया रिपोटरें के आधार
पर तथ्य दिया। उस आधार पर हमने अदालत में हलफनामा दाखिल किया।’’ पिल्लई ने कहा कि
गृह मंत्रालय मुठभेड़ की हकीकत का फैसला करने के पक्ष में नहीं था और यह पता करना अदालत
का काम है।इशरत जहां और तीन अन्य लोगों की वर्ष 2004 की कथित मुठभेड़ पर नया विवाद पैदा हो गया है
क्योंकि एक न्यायिक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह फर्जी थी।
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